Monday, 20 August 2018

जुबान बाई छम्मक छल्लो

निरंकुश ज़बानें धड़ाधड़ तालु से टकरा रहीं हैं बज रही हैं, किलप रहीं हैं और किलपा रहीं हैं। जेँसा "जी"मे आये वेंसी ध्वनी उत्पन्न कर रहीं हैं(जी एक असामान्य शब्द है जिसकी उत्पत्ति के बारे में हम कुछ नही जानते बस,🙄) संपूर्ण विश्व के जीवित वैज्ञानिक 
सशरीर ओर अजीवित सःआत्मा भारतीय प्रजातंत्र का प्रतिनिधित्व करने वाली जीबों (जीबों मतलब जिह्वा बुद्धिमान हूँ इसलिए समझा रहा हूँ,ज्ञान लेलो ओर स्वयं को सराहो बाद में मत कहना "बाद"कब आयेगा?हमें नहीं पता बस) अध्ययन करने में जुटे हुये हैं । इन जुबानों का मस्तिष्क के सांथ कोई संबंध नही है ये जानकर उन्हें रत्ती भर भी आश्चर्य नही हुआ।प्रायोगिक अध्यन से यह बात पहले ही प्रमाणित हो चुकी थी। अब ये सबाल उठ रहा था कि (पता नही ये सबाल उठता क्यों है बैठा क्यों नही रहता या सोया क्यों नहीं रहता,हमे नहीं पता बस)इन अनियंत्रित जुबानों का नियंत्रण कौन कर रहा है ?मूर्ख मत समझो अनियंत्रित कहने का तात्पर्य बेलगाम है बिलावजह खुश होने लगे कि हर कुछ लिख दिया।इधर प्रयोग चल रहे हैं उधर ज़बानें चल रहीं हैं,बाजारू वार्तालाप प्रजातंत्र को इतना शर्मिंदा कर चुका है कि वो भी बेशरम हो चुका है सांसारिक राग द्वेष से परे।
                     नेता मनचले होकर "A" प्रमाण पत्र की फ़िल्म बन गये हैं।सेन्सर बोर्ड प्रसारण मीडिया बेचैन होने की बजाय बिना कांट छांट के उनके हर डायलाग का रपीटिंग पे रिपीटिंग टेलीकास्ट कर रहा है-फिर ज़बान फिसली वे ये बोले ये बोले ये बोले बस यार अब रुक भी जाओ,शर्मिंदगी का घड़ा भर गया है झलकाओगे क्या?बुद्धी जीवी प्रकार के जनों ने अपनी अपनी बुद्धियाँ लाकरों रख कर ताले लगा दिये। अनर्गल प्रलाप कानों तक जाके ही रुक जाता है,क्यों समस्या लें? वैसे भी भारतीय राजनीति उथलेपन की बेमिशाल मिशाल है,अर्थात उथले पन से गुजर रही है देखना संभल के कहीं गुजर ही ना जाये गयी गुजरी।
            हम तो नेतृत्व की घण्टी गले में डाल घनघनाने बाले मानवों की बिगड़ेल जबानों का शरीर के दूसरे हिस्सों से सम्बन्ध की विवेचना कर रहे थे,भटके नहीं हैं प्रयोग तो चल ही रहा है पर पता नही प्रयोग करने बाले ज्ञानी विज्ञानी लोगों की ज़बानें लकबे की शिकार हो गयीं । निष्कर्ष ही एँसे प्राप्त हो रहे थे।जबानों का शरीर के किसी भी अंग के सांथ संबंध स्थापित ही नहीं हो रहा था , बेचारे हताश ओर निराश प्रयोगकर्ता अवसाद के शिकार हो के रह गये।हताशा में प्रयोग बंद करके जीवित पान खाने पान की दूकान पर पहुंचे अजीवित आत्माएं दुवारा नही आने का संकल्प करके अपने अपने लोक को प्रस्थान कर गयीं। पान बाला (लगभग सभी पान बाले) जितनी तेज पान में चूना ओर कत्था लगाता था उससे कहीं तेज उसकी जबान चलती थी।देश विदेश की हर घटना ओर दुर्घटना का सूचना केंद्र (भारत मे)चाय पान की दूकानें ओर केश कर्तनालय होते हैं।पत्रकारिता में डिग्री देने बाले संस्थान इन सूचना केंद्रों को जल्दी ही अपनी प्रयोगशाला घोषित करके शिक्षार्थियों की अधिकतर कक्षाएँ यहीं लगाने की योजना बना रहे हैं।
    तो साहब जब प्रयोगधर्मी जन पान की दूकान पर पहुंचे तो अनुभवी पान वाला इनकी बेचैनी को तुरंत भांप गया उसने कारण भी पूछ लिया,जब उसे कारण का पता चला तो ठठा कर हंस पड़ा(ठठाकर हँसना कोई सामान्य घटना नहीं है इसके लिये शरीर का नग,नग रोम,रोम सहयोग करता है इतना ही समझलो बस) साहब लोगों काहे इतना समय बरबाद किया हमसे बेसेई पूछ लेते।
   तुम्हे पता है!!
बताते हैं पान वाले ने पान लपेटते हुये कहा और अपने काम मे लग गया, जुबान भी चली पर कम बोला क्या बोला?
बोला **कुर्सी से**।।।।बेचारे प्रयोग कर्ता।।।।





madari

जमूरे तूने मुल्क देखी?
हाँ मदारी मेने मुल्क देखी है पर तूने मुल्क देखा?
क्या मतलब ?
तू मतलब बहुत पूछता है मदारी बड़ा ही मतलबी है।
ये क्या बकबास है जमूरे फालतू बात क्यों करता है।
मुल्क मतलब फालतू बात और मुल्क फ़िल्म काम की बात तू केंसा मदारी है,तू क्या हर मदारी ऐंसे ही हैं वो
मुल्क मूवी तो देखते हैं पर मुल्क नही देखते !
क्या मतलब है तेरा जमूरे?
मेरा मतलब बिल्कुल स्पष्ट है मदारी,ये मुल्क दुनियाँ के उन गिने चुने मुल्कों में है जहां नागरिक नही रहते अर्थात नागरिक विहीन मुल्क है!
हरकुछ बकवास।
बकबास नही मदारी दुर्भाग्य,ये मुल्क मेरा भी हैं! क्यों भाई जब तू इस मुल्क में रह रहा है खा रहा है, ह- रहा है तो फिर चिल्ला क्यों रहा है?"दया कुछ तो गड़बड़ है"?नही तो नागरिकता की बात सिद्ध करने की कोई बजह? वो भी बिलाबजह?ये मुल्क मेरा भी है "भाईजान"तो होने दो ना यार अब आगे भी बड़ो,तुम्हारा हमवतन देश के दूसरे नंबर के सबसे बड़े पद से रिटायर होकर कहता है  कि यहाँ उनके जेंसों के हालात बहुत खराब है वो राष्ट्र गीत के समय बैठा भी रहता था सर्व श्रेष्ठ पद फिर भी दयनीयता का राग!ये मुल्क मेरा भी है!तो फिर किरायेदार बाली बातेँ क्यों?ये मुल्क तुम्हारा है तो उस दूसरे की तरफ दारी क्यों जो तुम्हारी कीमती "वस्तु"छीनने के लिए तुम्हारी जन्नत को दोजख बनाये हुये है?हाँ "हम" कहते हैं कि ये मुल्क तुम्हारा भी है हाँ है पर तुम चिल्लाने के स्थान पर अपने व्यवहार से सिद्ध तो करो इस मुल्क को एक बार तो ईमानदार नजरों से नवाजो तो सही, फिर नही चिल्लाना पड़ेगा कि ये मुल्क हमारा भी है।
जमूरे????
हाँ मदारी तेरे जेंसे मदारियों ने इस मुल्क को पता नही ना जाने किस किस की बपौती बना दिया,नागरिकों का तो रहने है नही दिया वो कहते हैं कि "बापू' का मुल्क तो ये कहते हैं "बाबा" का मुल्क ये कोई नही कहता कि हिंदुस्तानियों का हिंदुस्तान!!फिर भी तू पूछता है इस नागरिक विहीन देश से की मुल्क देखी !!मेने केवल जेंडर बदला "देखी"की जगह "देखा" कर दिया तो तुझे कष्ट हो गया तेरा मदारित्व विफर गया,मदारी इस मदारित्व के चक्रव्यूह से बाहर निकल नही तो मुल्क के नाम का कोई नाम लेवा नही बचेगा।।पड़ोसी के सांथ खड़े होकर अपने घर की नींव खोद कर खुश होने बाले ही चिल्ला चिल्ला कर कह रहे हैं कि ये घर मेरा है,अरे उस घर की सुरक्षा करो उसे सजाओ संवारो तो दुनियाँ कहेगी कि ये घर तेरा है तो कहलवाओ दुनियाँ से,कब तक इंतजार करोगे बहुत देर तो हो ही चुकी है।।
जमूरे तू क्या है यार??


वक्त की मार अच्छे अच्छों को बदल देती है अब जमूरे भी बदलेंगे नही नाचेंगे स्वार्थी ओर भृष्ट मदारियों की चाल पर  ओर जब अपने अपने ही रहेंगे तो किसी को अपनी प्रमाणिकता सिद्ध नही करनी होगी।।।तब मिलेगा इस तराने को अर्थ कि-सारे जहाँ से अच्छा हिन्दोस्तां हमारा।।। क्रमशः

jamura part1

जमूरे मेरे इशारे पर नाचेगा?
नहीं
मेरी बात मानेगा?
नही नही।
फिर पेट कैंसे भरेगा ?
अपने आप।
हैं!अपने आप पेट कैंसे भर सकता है जमूरे?
मैं अब यूनीवर्सल जमूरा हूँ मदारी,वो जो तूने मुझे पालने की गलत फहमी पाली है ना उससे अब बाहर आजा,अब मैं केवल तेरे इशारे पर नही नाचूंगा।
पर नाचेगा फिर भी तेरी यही नियति है ।
हाँ नाचूंगा पर नचा नचा नचा कर।
मतलब?
मतलब अब मैं स्वतंत्र हूँ, किसी का गुलाम नही।
जमूरे अभी तू कह रहा था कि नाचेगा किसी के भी इशारे पर,पर नाचेगा। फिर स्वतंत्र कैंसे हो गया मेरे लाड़ले?
मदारी तू प्रश्न बहुत पूछता है,इस नाच में ओर पहले वाले नाच में फर्क है,अब जिसका इशारा दमदार होगा वो होगा मेरा माई बाप ओर मैं भी बनूँगा उसका माई बाप।
वा भाई वा--15 अगस्त मना लिया,फिर भी सोच से जमूराइ गयी नही।
मुझे जमूराइ से प्यार है i love jmoorai.
तो फिर स्वतंत्रता कैसी?
फिर प्रश्न तू जमूरा क्यों नहीं बन जाता मदारी?ये जो जमूरत्व का भाव है ना हमारे इधर इसका व्यापक महत्व है ये तो सर्व व्यापी है ,हर हिंदुस्तानी के अंदर एक जमूरा पाया जाता है बस वो मदारी अपनी सुबिधा से चुनता है,ओर इसी को कहते हैं सच्ची स्वतंत्रता परतंत्र मदारी।तो जगा अपने अंदर के जमूरे को फिर देख,,,
जमूरे ये तुझे क्या हो गया????
मदारी ये जमूरों का देश है,यहां हर छोटा बड़ा अमीर गरीब इत्यादि जमूरत्व की भावना को जी रहा है,बदलले स्वयं को,कुछ हाथ नही लगेगा इस मदारी पन में,जिनने ये बात समझ ली है वो इस लोक में विभिन्न सुख प्राप्त करके परलोक में भी सुखी रहेंगे क्योंकि उनके बच्चे विरासत में जमूरत्व प्राप्त करके नाना प्रकार के सुखों का उपभोग करेंगे।।चल अच्छा मेरी दूसरी बात मानले,माने तो बताऊं?
बताओ प्रभु मुझे आपका ज्ञान सूतजी महाराज जेँसा महसूस हो रहा है,आप ज्ञान के अक्षुण भंडार हो जमूराजी,नवाजो अपनी दिव्यता से हमें,
मुझे पता है कि मदारी तुम मेरा मजाक उड़ा रहे हो पर मैं इससे कतई प्रभावित नहीं हूँ बल्कि खुश ही हूँ,इसे कहते हैं जमूरत्व की महानता। चलो छोड़ो यार तुम तो वो दूसरी बात सुनो-तुम मदारित्व ओर जमूरत्व में साम्य स्थापित कर लो अर्थात उत्क्रमणीय हो जाओ अरे Reversible
अब आया समझ मे वो चले गए अगस्त में पर उनकी मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करली है मन मे इसी लिए उत्क्रमणीय नहीं समझे Reversible समझ मे आया।।ईश्वर की कृपा से जिन्हें पांच साल के लिए मदारित्व प्राप्त हुआ था वो चौथे साल में ही जमूरे बन गये, फिलहाल हम मदारी हैं।समझे मदारी ये जमूरों का देश है मदारित्व क्षणिक है इसे जी लो पर दिल मत लगाओ ये विनाशी है नस्ट हो जाता है पर जमूरत्व अजर अमर है,प्रथम अध्याय समाप्त दूसरा कल सुनाएंगे तब हमें तुम सोनकादिक ऋषि पुकारना पर हम कतई नही चिड़ेंगे।।।

ravan

रावण सज धज के जलने को तैयार खड़ा था,बड़ा खुश था कि श्रीराम आयेंगे उसे मुक्ती मिल जायेगी । एक साल उसे सदियों के बराबर लग रहा था।अभी पिछले ही साल उसे दशहरे पर मुक्ति मिली थी, पर वो मुक्त हो ही नही पाया, उसके जिस एटीट्यूड के कारण उसे राम के हाथों मरना पड़ा था उसको तो बह सदियों पहले ही छोड़ चुका था, नही नही उसने वो एटिट्यूड छोडा नहीं था वो तो उससे छिन गया था, छीनने बाले भी राम भक्त ही थे, इसलिए वो सन्तुष्ट था कि जो चीज उसकी छिनी थी उसको छीनने बाले उसके मुक्ति दाता के ही भक्त थे। चलो कोई बात नही जो छिन गया वो छिन गया प्रभु की मर्जी । अब तो मर्यादा पुरुषोत्तम आयें ओर दो चार वाण मारदें फिर फुंक जाऊं टेंशन खतम। एक राज की बात बताऊं मैं मैं हूँ ही नही, हाँ सच मे भगवान की कसम।जिस "मैं" ने मुझे हिंदू धर्म के इतिहास का सबसे बड़ा खलनायक बना दिया उस मैं में मैं बचा ही नही कब का खत्म हो गया। फिर मैं कौन हूँ ? अरे आप लोगों का वो ही एटीट्यूड हूँ जो आपने मुझसे छीन लिया। अब रावण , रावण बचा ही नही जो दिखता है वो आप लोगों का ही है, अरे वो ही मेरा एटीट्यूड जो आपने मुझसे छीन कर अपना बना लिया।।कबसे जला रहे हो! खत्म ही नही हो रहा!पाल पोस कर कितना बड़ा कर लिया सुरसा के मुंह से भी बड़ा! जलाओ साल में एक बार की जगह दो बार जलाओ,फिर भी बढ़ता ही जायेगा रावण का एटीट्यूड है,10 सर ओर 20 भुजाओं बाला तुम 100,100 लेकर घूम रहे हो । हंसी तब आती है जब प्रतियोगिता होती है मेरा रावण बड़ा तुम्हारा छोटा।अगली साल देंखेंगे इससे भी बड़ा बनाएंगे देखते ही रह जाओगे।ये राम लीला बालों ने मेरी हंसी के सांथ बड़ा अनर्थ किया हा हा  हा!!


कई बार तो मैं भी डर जाता हूँ।मेरी मुस्कराहट को अट्टहास बना दिया पाप है ये हाँ पाप से याद आया कि कुछ (अ)धर्म प्रेमी आजकल मुझसे सहानुभूति प्रदर्शित करने लगे हैं। क्या लगता है इससे मुझे ख़ुशी मिलती है? हा हा  हा अट्टहास का उदघोष करूं? सच्ची बात बताऊं ये रावणत्व है ना जो तुम लोगों ने मुझसे छीन लिया उसका समर्थन मुझे भी रास नही आता, अरे मुक्ति मिल गयी है तो मुक्त ही रहने दो अब मत करो यार उसका महिमा मंडन,मतकरो भगवान के नाम पर पूरा रावणत्व तुम्ही रखलो पर महिमा मंडन नही,चलो बहुत देर हो गई असली प्रतिनिधियों (मेरे) बुलाओ अपने नकली राम को कमर अकड़ गयी है तूम्हारे रावणत्व के बोझ उठाते उठाते।जलवाओ जल्दी जलवाओ राम के नाम पर जलाओ यार नाम भर ही तो हूँ असली आप हो, हो ही!!!@@

जुबान बाई छम्मक छल्लो

निरंकुश ज़बानें धड़ाधड़ तालु से टकरा रहीं हैं बज रही हैं, किलप रहीं हैं और किलपा रहीं हैं। जेँसा "जी"मे आये वेंसी ध्वनी उत्पन्न कर रह...