Monday, 20 August 2018

jamura part1

जमूरे मेरे इशारे पर नाचेगा?
नहीं
मेरी बात मानेगा?
नही नही।
फिर पेट कैंसे भरेगा ?
अपने आप।
हैं!अपने आप पेट कैंसे भर सकता है जमूरे?
मैं अब यूनीवर्सल जमूरा हूँ मदारी,वो जो तूने मुझे पालने की गलत फहमी पाली है ना उससे अब बाहर आजा,अब मैं केवल तेरे इशारे पर नही नाचूंगा।
पर नाचेगा फिर भी तेरी यही नियति है ।
हाँ नाचूंगा पर नचा नचा नचा कर।
मतलब?
मतलब अब मैं स्वतंत्र हूँ, किसी का गुलाम नही।
जमूरे अभी तू कह रहा था कि नाचेगा किसी के भी इशारे पर,पर नाचेगा। फिर स्वतंत्र कैंसे हो गया मेरे लाड़ले?
मदारी तू प्रश्न बहुत पूछता है,इस नाच में ओर पहले वाले नाच में फर्क है,अब जिसका इशारा दमदार होगा वो होगा मेरा माई बाप ओर मैं भी बनूँगा उसका माई बाप।
वा भाई वा--15 अगस्त मना लिया,फिर भी सोच से जमूराइ गयी नही।
मुझे जमूराइ से प्यार है i love jmoorai.
तो फिर स्वतंत्रता कैसी?
फिर प्रश्न तू जमूरा क्यों नहीं बन जाता मदारी?ये जो जमूरत्व का भाव है ना हमारे इधर इसका व्यापक महत्व है ये तो सर्व व्यापी है ,हर हिंदुस्तानी के अंदर एक जमूरा पाया जाता है बस वो मदारी अपनी सुबिधा से चुनता है,ओर इसी को कहते हैं सच्ची स्वतंत्रता परतंत्र मदारी।तो जगा अपने अंदर के जमूरे को फिर देख,,,
जमूरे ये तुझे क्या हो गया????
मदारी ये जमूरों का देश है,यहां हर छोटा बड़ा अमीर गरीब इत्यादि जमूरत्व की भावना को जी रहा है,बदलले स्वयं को,कुछ हाथ नही लगेगा इस मदारी पन में,जिनने ये बात समझ ली है वो इस लोक में विभिन्न सुख प्राप्त करके परलोक में भी सुखी रहेंगे क्योंकि उनके बच्चे विरासत में जमूरत्व प्राप्त करके नाना प्रकार के सुखों का उपभोग करेंगे।।चल अच्छा मेरी दूसरी बात मानले,माने तो बताऊं?
बताओ प्रभु मुझे आपका ज्ञान सूतजी महाराज जेँसा महसूस हो रहा है,आप ज्ञान के अक्षुण भंडार हो जमूराजी,नवाजो अपनी दिव्यता से हमें,
मुझे पता है कि मदारी तुम मेरा मजाक उड़ा रहे हो पर मैं इससे कतई प्रभावित नहीं हूँ बल्कि खुश ही हूँ,इसे कहते हैं जमूरत्व की महानता। चलो छोड़ो यार तुम तो वो दूसरी बात सुनो-तुम मदारित्व ओर जमूरत्व में साम्य स्थापित कर लो अर्थात उत्क्रमणीय हो जाओ अरे Reversible
अब आया समझ मे वो चले गए अगस्त में पर उनकी मूर्ति की प्राण प्रतिष्ठा करली है मन मे इसी लिए उत्क्रमणीय नहीं समझे Reversible समझ मे आया।।ईश्वर की कृपा से जिन्हें पांच साल के लिए मदारित्व प्राप्त हुआ था वो चौथे साल में ही जमूरे बन गये, फिलहाल हम मदारी हैं।समझे मदारी ये जमूरों का देश है मदारित्व क्षणिक है इसे जी लो पर दिल मत लगाओ ये विनाशी है नस्ट हो जाता है पर जमूरत्व अजर अमर है,प्रथम अध्याय समाप्त दूसरा कल सुनाएंगे तब हमें तुम सोनकादिक ऋषि पुकारना पर हम कतई नही चिड़ेंगे।।।

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